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कहानी: ताड़ का भूत

The Hind Paridhan

मौसम अजीब था। हवाएं शांत थी। चाँद बादलों के पीछे जा छिपा था। टिमटिमाते तारे आज दिखाई नहीं दे रहे थे। अंधेरा इतना था कि रास्ते नजर नहीं आते थे। वह टोल-टटोलकर अपना कदम बढ़ा रहा था।

THPसड़क के दोनों ओर लगे लंबे ताड़ के पेड़ बहुत भयानक से लग रहे थे। दूर कहीं खेतों में से सियार के रोने की आवाज़ आ रही थी। झींगुर लगातार बोल रहे थे। अचानक कभी बंद पड़ी हवाएँ चलने लगती तो पेड़ों की पत्तियों में सरसराहट होती, ऐसा लगता मानो कोई पेड़ पर बैठा है और उसे देखकर पेड़ की डालियों को हिला रहा है।

डर से उसका बुरा हाल हो जाता और वह मन में हनुमान चालीसा पढ़ने लगता। वो तेज कदमों से बढ़ रहा था अपने घर की ओर मगर इतना भी तेज नहीं कि हड़बड़ी में किसी गड्ढे में गिर पड़े। वह जल्दी घर पहुंचना चाहता था मगर रास्ता खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था। वह निरंतर चलता जा रहा था मगर उसे यह डर भी सता रहा था की कहीं इस अंधेरे में वह अपना रास्ता ना भटक जाए। कुछ दूर चलने के बाद उसे एक रोशनी दिखाई दी।

वह उसका घर था। दरवाजे के बाहर शायद अभी भी लालटेन टंगा हुआ था जिसकी रोशनी उसे दूर से ही दिखाई पड़ रही थी। हालांकि अब घर बहुत नजदीक था, मगर अब भी उसे ताड़ के तीन पेड़ पार करने थे। धीरे-धीरे उसका डर भी कम होने लगा था। उसने कदमों की रफ्तार बढ़ा दी। पहले दो ताड़ के पेड़ उसने पार कर लिए। अब बारी आखरी ताड़ के पेड़ की थी।

वह जैसे ही तीसरा पेड़ पार करने लगा, अचानक उसकी पीठ पर कोई ऊपर से कूदा। उसे कोई हाथ महसूस हुआ। जैसे तेज कड़कड़ाती बिजली उसके पीठ पर आ गिरी हो। वह भूत-भूत…. चिल्लाता दौड़ पड़ा। घर पहुँचकर उसने सारी कहानी घर वालों को बता दी। घर में दहशत का माहौल हो गया। कोई उस वक्त वहां जाकर यह पता नहीं करना चाहता था कि दरअसल हुआ क्या था। उसे रात भर डर लगता रहा। रात भर उसे नींद भी नहीं आई।

अगली सुबह पहले पहर पूरे गाँव में यह शोर मच गया कि ताड़ के पेड़ पर भूत है। जब गाँव के लोग उस जगह यह जानने गए कि क्या वाकई उस पेड़ पर भूत है?

पहुंचे तो उन्होंने वहां कुछ भी नहीं पाया। वहाँ बस एक ताड़ का पत्ता पड़ा था। उसने उस तार के पत्ते को बड़े गौर से देखा और कल रात वाली घटना को याद किया फिर अपनी मूर्खता पर ठहाके मार-मार कर हंसने लगा। वह समझ गया कि ताड़ के पेड़ से कल कोई भूत नहीं कूदा था, दरअसल वह यहीं ताड़ का पत्ता था जिससे वह इस कदर डर गया था।

लो कल्लो बात।

चित्रण: सिद्धांत राज वर्मा
आकाश कुमार 'अक्की'
आकाश कुमार 'अक्की'
आकाश कुमार एक बेहतरीन वक्ता है, साथ ही कविता-कहानी लिखने में माहिर भी। आकाश फिलहाल एक संस्था में बच्चों को सृजनात्मक लेखन के गुर से अवगत करवा रहें है।
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