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मीडिया जो बिकने को चला, तो हो गया एक्सपोज़

Pic: scroll.in

1 अगस्त 2017, वह दिन जब मैं पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रशिक्षु बन आया था। कॉलेज के पहले दिन हमारी कॉलेज की निदेशिका ने हमें पत्रकारिता के नैतिकता के बारे में बताया तथा हमें अपने कर्तव्यों की शपथ दिलवाई। उस दिन मेरा 32 इंच का सीना फूला था.. क्यूँकि उस दिन के बाद से मैंने खुद को एक पत्रकार से कम नहीं समझा।

जब सर्दी की छुट्टियां हुई तो वापस पटना लौटा; जहाँ मुझसे एक शख्श ने कहा… “ये देश की मीडिया तो बिक चुकी है, तुम इसकी पढ़ाई क्यूँ कर रहे हो? तुम भी इन नेताओं की दलाली करोगे क्या?”

ये बात मेरे दिल में घर कर गई, और नतीजतन ‘द हिन्द परिधान’ का जन्म हुआ। द हिन्द परिधान को सार्वजनिक अनुक्षेत्र में लाने का मेरा और मेरे सह-संस्थापकों का यही मकसद रहा है और रहेगा की मीडिया की गिरती और खोते विश्वास को पुनः प्रबुद्ध करे।

26 मई, 2018 को ऑनलाइन पोर्टल www.cobrapost.com ने अपनी वेबसाइट पर स्टिंग ऑपरेशन वीडियो के साथ साझा किया। यह स्टिंग ऑपरेशन देश के बड़े मीडिया घरानों के बिकने एवं पैसे लेकर एजेंडा सेट करने के ऊपर आधारित है।

हालाँकि, हमारा संस्थान अभी नवीन है पर है तो इस देश के मीडिया उद्योग का एक हिस्सा। और हमें आज शर्म आती है खुद को मीडिया उद्योग का एक हिस्सा बताने में। क्यूँकि हमने अब इस उद्योग का एक पक्ष देख लिया है जो बदसूरत है; जिसने नैतिकता के ऊपर आर्थिक फायदे को देखा है और जो पक्षपात करने के लिए करोड़ो का समझौता करने को तैयार बैठा हैं।

कुल 42 ऐसी मीडिया संस्थाने है जो बिकने को तैयार हो गई है, उनके बारे में आप www.cobrapost.com की वेबसाइट पर जाकर पढ़ सकते है। वैसे मीडिया को लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के रूप में देखा जाता है, पर ये अंदर से इतनी खोखली हो रही है ये देखना अत्यंत ही लज्जाजनक है। पर इनमे दो संस्थाएँ ऐसी भी जिन्होंने पैसे लेकर किसी भी प्रकार के एजेंडा बनाने से साफ़ इंकार कर दिया है।

बहरहाल, भारत राजनीति के सबसे गंदे दौर से गुजर रहा है। सत्ता और शक्ति के इस खेल में सवा सौ करोड़ से ज्यादा नागरिक पीसे जा रहे है। यहाँ मैं किसी भी तरह का एजेंडा सेट करने की कोशिश नहीं कर रहा ना ही किसी राजनैतिक पार्टी के पक्ष और विपक्ष में बोल रहा हूँ। क्यूँकि इसका आकलन एवं मूल्यांकन करने वाले पंडित तो पहले से ही फेसबुक और ट्विटर पर भारी मात्रा में मौजूद है। मानो आज सरदार वल्लभ भाई पटेल और जयप्रकाश नारायण की याद कुछ ज्यादा ही आ रही है। मन बहुत विचलित है।

पर आप फिक्र ना करें, ‘द हिन्द परिधान’ हर हालात में सच के साथ बना रहेगा। क्यूँ? क्यूँकि इस संस्थान को आकार देने और लिखने वाले आप ही लोग है, यह हम सभी का मंच है। हम सिर्फ सच की पत्रकारिता करना जानते है क्यूँकि हमारे लिए हमारा देश सर्वोपरि है। चाहे हम आर्थिक तौर से कितने भी दिवालिया और कमजोर क्यूँ ना हो जाए पर अपने कर्तव्य और नैतिकता से समझौता कभी नहीं करेंगे।

Pawan Raj
Pawan Raj
Pawan Raj is a dreamer who has dreamed of bringing citizen journalism to the masses. That is how THE HIND PARIDHAN came into existence.

2 thoughts on “मीडिया जो बिकने को चला, तो हो गया एक्सपोज़

    1. हमें मीडिया के उत्थान के लिए प्रयासरत होना होगा, सैयद भाई। 🙂

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