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मैं मनोरंजन के लिए समाचार देखता हूँ

इस लेख का शीर्षक काफ़ी अटपटा है, मगर ये एक कटु सत्य है। आज से 15 वर्ष पहले एक आम बच्चे की तरह मुझे भी समाचार में कोई रूचि नही थी। मगर जैसे-जैसे समय बीतता गया, मेरी ज़िन्दगी की तरह मेरी रुचियाँ भी बदलने लगी। इसका कारण मेरा मानसिक विकास तो था ही मगर उस से कई अधिक श्रेय मसाला पत्रकारिता अर्थात यैलो जर्नलिज़्म को भी जाता है। एक समय पर टीवी पर केवल विषयनिष्ट समाचार प्रेषण होता था, फिर ख़बरों की व्याख्या करने का चलन आया, और अब अपने विचारों को थोपना ही एक सच्चे पत्रकार की निशानी है।

पिछले प्रेस फ़्रीडम इंडेक्स के आंकड़ों के अनुसार, भारत 138वें पद पर स्थिर है, जिसका मुख्य कारण छद्म राष्ट्रवाद और स्वयं-अभिवेचन है। हर न्यूज़ चैनल की अपनी एक कार्यावली है, किसी को प्रधानमंत्री से मोहब्बत है, तो किसी को नफ़रत। कुछ पत्रकार सही को ग़लत करने में लगे हैं तो कुछ ख़ामोश हैं। किसी को तथ्य पर बात ही नही करनी है। शायद यह आक्रामक रवैया ही है जो मुझे समाचार देखकर मनोरंजित होने के लिए आकर्षित करता है।

बात-बात पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात करने वाले लोगों के लिए अब यह समझ से बाहर है कि देश और सरकार दो अलग-अलग चीज़ें हैं। अगर कोई सरकार की आलोचना करता है तो शायद वो देश का भला ही चाहता हो। सरकार की प्रशंसा के साथ-साथ आलोचना करना ही पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए मगर कुछ बुद्धिजीविओं की नज़र में एक आलोचक ही सच्चा देशद्रोही है। अगर पत्रकारिता का स्तर यही रहा तो वो दिन दूर नही जब लोग सिनेमाघरों की जगह न्यूज़रूम आया करेंगे। किसी ने ठीक ही कहा है कि “अगर बात में दम हो तो चीख़ने की क्या आवश्यकता” ?

Syed Zuhair Ali
Syed Zuhair Ali
A student of Journalism and Mass Communication who loves to write about social issues through his poetries.
http://thehindparidhan.com
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