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मानव इतिहास में पहला विध्वंस हमला जिसने इंसानियत पर सवाल खड़े कर दिए

hiroshima

1 लाख 40 हजार लोग मारे जा चुके थे। अमेरिका और जापान का तनाव चरम पर था। 6 अगस्त, 1945 को दुनिया में पहली बार मानव इतिहास में एटॉमिक हमला हुआ। अमेरिका के बी-29 बॉम्बर विमान ने जापान के शहर हिरोशिमा पर यह विंध्वस हमला किया था। इस भयानक विस्फोट को कोई समझ पाता इससे पहले ही 90 प्रतिशत शहर की आबादी काल के गाल में समा चुकी थी और जो कुछ लोग बचे वो भी विस्फोट से निकले विकिरण (रेडिएशन) के चपेट में आकर बड़ी मार्मिक मौत मरे…

हिरोशिमा के ऊपर आसमान से गिरे एटम बम का नाम कथित तौर पर ‘लिटिल बॉय’ दिया गया था। दुनिया सकते में थी। कोई कुछ समझ नहीं पा रहा था। जापान के लोगों की स्तिथि इससे बुरी कभी हो नहीं सकती थी। अमेरिका ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी को घुटने पर ला खड़ा कर दिया था। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान जीत की कगार पर था। अमेरिका अपनी हार की परिस्थिति पहले ही भाँप चुका था। अपनी रही बची साख को बचाने के लिए अमेरिका ने सुबह 8 बजकर 15 मिनट (जापानी समयानुसार) पर लिटिल बॉय नामक एटम बॉम्ब को पैराशूट से नीचे गिराया।

Hiroshima                                                    हिरोशिमा में एटम बम के फटने के बाद का गुबार

अलबत्ता, अभी जापान अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर ही रहा था की 9 अगस्त, 1945 को अमेरिकी बॉम्बर विमान बी-29 ने इस बार एक और तीव्र सघनता के एटम बम को जापान के दूसरे शहर नागासाकी पर गिराया। इस बार के एटम बम को ‘फैट मैन’ का नाम दिया गया। जापानी समयानुसार यह एटम बम 11 बजाकर 02 मिनट पर सुबह को गिराई गई थी। इस दूसरे हमले ने अकेले ही 74 हजार  जापनियों की ज़िन्दगी ले ली। जापान अब पूरी तरह से टूट चुका था।

Little boy                                                                         ‘लिटिल बॉय’ परमाणु बम विस्फोट से पहले
fat man                                                                        ‘फैट मैन’ परमाणु बम विस्फोट से पहले

आज भी परमाणु हमले के कारण घातक विकिरण वहाँ के लोगो के लिए जान का खतरा बना हुआ है। जेनरेशनल कैंसर जैसी बीमारियाँ आज भी कुछ हिस्सों में बसी जनसँख्या को अपने आगोश में लेती है। 73 साल पहले अमेरिका ने जो जख्म जापान और इंसानियत को दिए उसकी दहशत आज भी बरक़रार है। परमाणु हमले से हुए नुकसान का अंदाजा दुनिया आज भी सही ढंग से नहीं लगाई पाई है।

Torso                                    परमाणु हमले की चपेट में एक युवक

इन हमलों के कुछ ही दिनों बाद 15 अगस्त, 1945 को जापान के सम्राट ‘हिरोहितो’ ने आत्मसमपर्ण की घोषणा कर दी। और चंद दिनों बाद दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति भी हो गई। पर दुनिया के घाव बढ़ चुके थे। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना हुई। और संघ की पहली महासभा में परमाणु बम और अंतर्राष्ट्रीय शान्ति के प्रस्ताव को 24 जनवरी 1946 को सर्वसम्मति से पारित किया गया। इस प्रस्ताव में निम्न बातें की गई थी:

  • परमाणु ऊर्जा पर नियंत्रण
  • शांतिपूर्ण उद्देश्य के लिए इस्तेमाल
  • परमाणु हथियार से मुक्त हो दुनिया

इसके बाद 1968 में परमाणु हथियार अप्रसार संधि लाया गया। और 5 मार्च 1970 से एन.पी.टी लागू की गई थी। इसमें यह प्रावधान कहा गया की 1 जनवरी 1967 के बाद से परमाणु हथियार को बनाए जाने पर पाबंदी लगाए जाए। यह संधि उन देशों पर लागू नहीं होती जिनके पास संधि के लागू होने तिथि से पहले परमणु हथियार है। मतलब की वो देश परमाणु हथियार विकसित कर सकते है। इस संधि पर भारत, पाकिस्तान और इजराइल ने आज तक सहमति नहीं जताई और हस्ताक्षर नहीं किया है। 2003 तक दक्षिण कोरिआ भी इस संधि में शामिल था पर उसने उसी साल अपना नाम वापस ले लिया। गौरतलब है की 2011 में विश्व मानचित्र में एक नए देश के रूप में उभरा दक्षिण सूडान ने भी इस संधि को नहीं अपनाया है।

इसके बाद संयुक्त राष्ट्र संघ ने परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए कई पहल किए और लगभग प्रयासों में सफल भी रहा है। परन्तु अब जब जापान ने इतनी बड़ी त्रासदी झेल ली है उसके उपरांत। हम और आप घर में बैठ फ़ोन या लैपटॉप पर आर्टिकल पढ़कर इस विनाशकारी हमले का वर्णन तक नहीं कर सकते, इसलिए एक वीडियो लगा रहा हूँ, देख लीजिएगा:

Pawan Raj
Pawan Raj
Pawan Raj is a dreamer who has dreamed of bringing citizen journalism to the masses. That is how THE HIND PARIDHAN came into existence.
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