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कहानी: एक मासूम परी

Child Abuse

हर कहानी के दो पहलू होते हैं, एक वह जो हमें दिखाया जाता है और दूसरा वह जिसे लोग कहीं दफ़ना देना चाहते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी थी परी की। 132 करोड़ की आबादी वाले इस देश में न जाने कितनी परियां हैं और कितने राक्षस, इस कहानी के

मुझे हिंदी नहीं आती

वो क्या है ना “हिंदी हमारी मात्रभाषा है, बोलने मे कूल लगेगा, अगर मैंने हिंदी मे लिखा तो शायद लोगो को लगे, अरे... इसे तो अंग्रेज़ी आती ही नहीं, ख़ैर मैं तो यही सोचती हूँ, पर क्या आप भी ? सही कहा ना मैंने शायद ? आप लोग भी कुछ

कविता: मैं पहले जैसी नहीं रही

हाँ मैं पहले जैसी नहीं रही पहले फर्क नहीं पड़ता झुलसते गर्मी से या पेट की बढ़ती चर्बी से ना ही गलियाँ तंग लगती ना दिवाल बेरंग लगती मैं सचमुच पहले जैसी नहीं रही !!! तब, राजनीति अखबारों का विषय होता मुनिया माय के घर की बातें हमारी समस्या !!! मर्दों में

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