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आख़िर क्यों है अनवर एक सामाजिक व्यंग्य ?

हर दशक में कुछ ऐसे चलचित्र आते हैं जो भले ही बॉक्स ऑफ़िस पर धमाल न मचा पाएं मगर अपने नज़रिये और संगीत से लोगों के दिल जीत लेते हैं। 2007 में मनीष झा के निर्देशन में दिखाई गयी अनवर भी उसकी एक बेहतरीन मिसाल है। फ़िल्म की कहानी में

नशा, बॉलीवुड, अय्याशी और हम

"सिगरेट के धुंए का छल्ला बनाके। " यह पंक्ति कोई नशेबाज़ या व्यसनी की नही बल्कि हमारे बॉलीवुड के एक गाने से उठाई गयी है। इस बात में कोई दो राय नही कि हिंदी चलचित्र अक्सर सच्चाई को दर्शाते हैं मगर इसी बॉलीवुड के कारण सिगरेट, नशा और अय्याशी जैसे नकारात्मक

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