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कहानी: ताड़ का भूत

The Hind Paridhan

मौसम अजीब था। हवाएं शांत थी। चाँद बादलों के पीछे जा छिपा था। टिमटिमाते तारे आज दिखाई नहीं दे रहे थे। अंधेरा इतना था कि रास्ते नजर नहीं आते थे। वह टोल-टटोलकर अपना कदम बढ़ा रहा था। सड़क के दोनों ओर लगे लंबे ताड़ के पेड़ बहुत भयानक से लग रहे

कहानी: दो रुपए की बेटी

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पापा सिरदर्द से कराह रहे थे इसलिए मैं उनकी दूसरी बेटी से लड़ने पहुँच गयी. उसे पापा दो रुपए में लेकर आये थे, इसलिए ख़्याल नही रखती होगी, मेरा मानना था... बात तब की है जब मैं दस साल की थी. मैं इकलौती बहन थी. पापा मुझसे बहुत प्यार करते थे,

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