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जिन्ना का फोटो ना हुआ, बवाल हो गया।

मैं अक्सर गर्मी की छुट्टियों में अपने नानी घर जाया करता था। नानाजी से मुझे बचपन से ही बेहद लगाव रहा है। रात के वक़्त छत पर वो हमें किस्सा सुनाया करते थे। किस्से-कहानियाँ अपने बचपन की जब पूरा देश अँग्रेजी हुकूमत का गुलाम था। जिस समय देश आज़ाद हुआ उस समय नानाजी बारह वर्ष के थे। वो आपबीती सुनाते समय अपने बाँह पर कटे का लम्बा निशान भी हमें दिखाते थे। ये उम्र भर का निशान उन्हें भारत-पाक बँटवारे के दौरान मिला था। जानवर तो मरे ही साथ ही इंसानो को भी जानवरों की तरह मार दिया गया था। बिहार और बंगाल की हालत बहुत बदतर थी। ये विस्थापन ना हुआ होता तो आज कितने मसले सुलझे रहते।

पर ऐसी निर्मम त्रासदी हुई क्यूँ? क्यूँकि सत्ता का अलग ही नशा होता है। भारत के विभाजन में अगर किसी का सबसे बड़ा हाथ रहा है तो वह मोहम्मद अली जिन्ना का था। यह बात मेरी नहीं अपितु कई इतिहासकारों एवं मेरे नानाजी के द्वारा कही गई है। जिन्ना सत्ता पाने की लालसा में इस कद्र लालची हो चले थे की उन्होंने मुसलमानो के लिए अलग देश बनाने की माँग कर दी। साम्प्रदायिकता की राजनीति सबसे घिनौनी राजनीती होती है, जिसे करने में जिन्नाह माहिर थे।

इस विभाजन से किसी का भला नहीं हुआ सिवाय एक शख्स के। हिन्दुस्तान-पाकिस्तान के कई लोग जिन्ना के निजी स्वार्थ के भेंट चढ़ गए। कितने अनाथ हुए, कितनी विधवाएँ हुई तथा कितनो के आशियाने उजड़ गए, इसका अंदाजा भी लगा पाना मुश्किल है। वह क्षण मानवजाति के इतिहास में सबसे दुखद रहा था।

आज भारत को आजादी मिले 71 साल से ज्यादा हो गए। पाकिस्तान और हिंदुस्तान के सम्बन्ध कैसे है, यह सभी को मालूम है। इसी बीच 1 मई, 2018 को खबर आती है कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर लगी हुई है। तबसे देश में इसे लेकर बवाल मचा हुआ है।

इस मुद्दे को जरूरत से ज्यादा तूल दे दी गई है। दो गुट बँटे।  एक जिन्होंने, फोटो उतरवाकर छोड़ेंगे की कसम खाई है और दूसरा जिसने उतरवाकर दिखाओ के नारे बुलंद कर रही है। इस बीच किसी का भला हो रहा है तो छुटपुट उभरे राजनीती में आने का प्रयास करने वाले लड़कों का।

यूनिवर्सिटी के छात्र कह रहे है की जिन्ना हमारे एलुमनाई थे और उन्हें आजीवन मेम्बरशिप प्रदान की गई थी। तो देखो दोस्तों ऐसा है की तुम अपने घर में अपने पड़ोसी की फोटो नहीं ही लगाओगे भले ही वो क्यूँ ना बहुत बड़ा तीस मार खान हो। और यहाँ तो बात हो गई उनकी जिनकी ज़िद की वजह से भारत-पाकिस्तान बँटे और दोनों के मध्य अंतर्राष्ट्रीय सीमा खींच दी गई। फोटो लगे रहने का समर्थन वो लोग कर रहे है जिन्होंने आज़ादी मिलने के संघर्ष को कभी महसूस ही नहीं किया। हमारे स्वतंत्रा सेनानियों के बलिदान का यह परिहास नहीं तो और क्या है?

Pic: Zee Media

अब यह घटना जो घट रही है कितनी सही है और कितनी नहीं; यह आप बेहतर जानते-समझते होंगे। मैं तो अक्सर यह प्रार्थना करता हूँ कि भगवान हम सबको सद्बुद्धि दे।

Pawan Raj
Pawan Raj
Pawan Raj is a dreamer who has dreamed of bringing citizen journalism to the masses. That is how THE HIND PARIDHAN came into existence.

10 thoughts on “जिन्ना का फोटो ना हुआ, बवाल हो गया।

  1. काफ़ी अच्छा लिखा है। इस कहानी का रोमांच अंत तक बना रहा। काफी कुछ पता भी चला। आगे भी ऐसे ही लिखते चलो।

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